नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का भव्य आगाज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में होगा महाध्वजारोहण

महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 12 साल बाद आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ 2026-28 का आज, 31 अक्टूबर को भव्य शुभारंभ हो रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में नासिक के रामकुंड पर महाध्वजारोहण समारोह आयोजित किया जा रहा है। वहीं, त्र्यंबकेश्वर के पवित्र कुशावर्त तीर्थ पर भी ध्वजारोहण का कार्यक्रम निर्धारित है। दोनों धार्मिक स्थलों पर एक साथ होने वाला यह आयोजन कुंभ मेले की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक बनेगा।

दोपहर 12:02 बजे होगा महाध्वजारोहण

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शनिवार को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में ध्वजारोहण का शुभ मुहूर्त रखा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नासिक के रामकुंड में ध्वज स्तंभ पूजन, ध्वजा पूजन और महाध्वजारोहण समारोह में शामिल होंगी। त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार, संत-महात्मा और 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

550 लोगों का शंखनाद और 6,500 आदिवासी करेंगे महा आरती

इस समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण सामूहिक शंखनाद और महा गोदावरी आरती होगी। आयोजन की जानकारी के अनुसार, लगभग 550 लोग एक साथ शंखनाद करेंगे। इसके अलावा, करीब 6,500 आदिवासी महिला और पुरुष रामकुंड पर सामूहिक महा गोदावरी आरती में भाग लेंगे।

इस विशेष आयोजन में महाराष्ट्र के सात तालुकों के लगभग 650 गांवों और बस्तियों से आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे। इसका उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के साथ आदिवासी संस्कृति, सामाजिक समरसता और गोदावरी नदी के संरक्षण का संदेश देना भी है।

रामकुंड और कुशावर्त तीर्थ पर बनाए गए भव्य ध्वज स्तंभ

नासिक के रामकुंड में 51 फीट ऊंचा पंचधातु से निर्मित धर्मध्वज स्तंभ स्थापित किया गया है। वहीं, त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर 31 फीट ऊंचा ध्वज स्तंभ तैयार किया गया है, जिस पर 62 किलोग्राम पीतल का मुलम्मा चढ़ाया गया है। दोनों स्थानों को आकर्षक रोशनी, भगवा ध्वजों और पताकाओं से सजाया गया है।

कुंभ गीत, स्मारक डाक टिकट और वेबसाइट का होगा अनावरण

महाध्वजारोहण समारोह के दौरान कई विशेष कार्यक्रम भी निर्धारित हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों कुंभ मेले के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ, कुंभ गीत का विमोचन, स्मारक डाक टिकट का अनावरण और कॉफी टेबल बुक का प्रकाशन कार्यक्रम में शामिल हैं। इन पहलों के माध्यम से नासिक-त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन को लेकर जरूरी सूचना

ध्वजारोहण समारोह और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए 31 अक्टूबर को त्र्यंबकेश्वर मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए शाम 6 बजे तक बंद रखने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, स्थानीय निवासियों और अधिकृत दर्शन पास रखने वाले लोगों को छूट दी गई है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर के बीच यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। इसलिए श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन के निर्देशों की जानकारी लेनी चाहिए।

2027 में होंगे प्रमुख अमृत स्नान

सिंहस्थ कुंभ 2026-28 का आयोजन नासिक और त्र्यंबकेश्वर में लगभग 21 महीनों तक चलने की योजना के तहत किया जा रहा है। वर्ष 2027 में इसके प्रमुख अमृत स्नान आयोजित होंगे। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, 31 अगस्त 2027 को श्रावण अमावस्या के अवसर पर मुख्य अमृत स्नान होगा। इसके बाद 11 सितंबर 2027 को भाद्रपद शुक्ल एकादशी पर अंतिम प्रमुख स्नान निर्धारित है। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में साधु-संतों, अखाड़ों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ का यह शुभारंभ धार्मिक आस्था के साथ महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी महत्वपूर्ण अवसर है। रामकुंड पर महाध्वजारोहण, सामूहिक शंखनाद और हजारों आदिवासी श्रद्धालुओं की महा गोदावरी आरती इस आयोजन को विशेष पहचान देने जा रही है।

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